दिनेश भाई, यह कहना कि “जनता को भरोसा नहीं है” अपने-आप में EVM को हटाने का पर्याप्त कारण नहीं बन जाता। किसी भी लोकतंत्र में भरोसा तथ्यों, पारदर्शिता और प्रक्रिया से बनता है, न कि केवल आशंका से। सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि भारत की EVM पूरी तरह ऑफलाइन मशीन है — न उसमें इंटरनेट होता है, न ब्लूटूथ, न वाई-फाई। इसे हैक करने का दावा आज तक कोई भी तकनीकी विशेषज्ञ अदालत या चुनाव आयोग के सामने साबित नहीं कर सका। भारत में EVM के साथ VVPAT (वोटर वेरिफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) जोड़ा गया है, जिससे मतदाता स्वयं देख सकता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया या नहीं। यह सुविधा अमेरिका, फ्रांस या ब्रिटेन जैसे देशों में भी नहीं है। जहाँ तक अन्य देशों का सवाल है — अमेरिका, जर्मनी, जापान जैसे देशों की जनसंख्या, मतदान केंद्रों की संख्या और मतदाताओं की विविधता भारत से तुलना योग्य नहीं है। भारत में एक ही दिन में 90 करोड़ से अधिक मतदाताओं का शांतिपूर्ण मतदान कराना केवल EVM से ही संभव हुआ है। यदि बैलेट पेपर की बात करें तो इतिहास गवाह है कि — बूथ कैप्चरिंग फर्जी मतदान बैलेट बॉक्स लूट लाखों वोटों का रद्द होना ये सब...