भागी हुई बेटी का पिता: दर्द, संघर्ष और समाज की सच्चाई

"भागी हुई बेटी का पिता"

हत्यारे का पिता छुप सकता है 
बलात्कारी का पिता छुप सकता है 
दंगाई लुटेरे और डकैत का पिता छुप सकता है 
लेकिन भागी हुई बेटी का पिता नहीं छुप सकता - 

उसका चेहरा बता देता है 
कि जिसे बीस पच्चीस बरस दाना पानी दिया 
वह चिड़िया फुर्र से उड़ गई..

और मुँह पर फेंक कर गई 
बीट में लिथड़े हुए नोचे हुए रंगीन पंख! 

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भागी हुई बेटी का पिता 
अचानक झुक कर चलने लगता है 

बूढा हो जाता है 
हफ़्ते भर में 

दोगुने हो जाते हैं 
दाढ़ी और खोपड़ी के सफ़ेद बाल 

शर्ट पर सिलवटें आ जाती हैं 
पेंट के पांयचे रगड़ खाते हैं आँगन और सड़कों पर 

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भागी हुई बेटी का पिता 
किराने की दुकान बदल लेता है 

सब्ज़ी उस ठेले से नहीं खरीदता 
जिससे खरीदा करता था 

उस नाई से सुँवार नहीं करवाता 
जिस नाई को उसके घर के बारे में सब कुछ पता था 

भागी हुई बेटी का पिता 

रद्दी वाले से 
कचरा उठाने वाले से 
बागवानी करने वाले से 
सबसे बचता फिरता है लेकिन पकड़ लिया जाता है 

उसके आँसू चिलकते हैं 
जैसे रेगिस्तान के कुएँ में थोड़ा सा पानी! 

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वह अपनी पत्नी को खाने को दौड़ता है 

"तूने ही शह दी थी उसे" 

वह अपने लड़कों से कहता है 

"तुम सब कहाँ मर गए थे सालो" 

वह अपने रिश्तेदारों से कहता है 

"मेरी परवरिश में कमी थी भाईजी" 

वह अड़ोसियों-पड़ोसियों से कहता है 

"उसकी मर्ज़ी है / मुझे बताती तो मैं ही करवा देता" 

वह अपने आप से कहता है 

इससे बढ़िया गोली मार देती मेरे" 

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भागी हुई बेटी का पिता 

उसे 
आधी रात को यह ख़तरनाक ख्याल आता है 
उसकी बेटी पर सवार है एक कमीना 
नोच रहा है उसका गोश्त 
जिसे मैंने नहीं चुना 

कोई मेरी बेटी को निचोड़ रहा है 
फ़ायदा उठा रहा है उसका 

कितनी पागल है मेरी लड़की 
कितनी भोली 
किसके चक्कर में फंस गई 

और फिर वह रात भर आंगन और छत पर चक्कर काटता है 

वह जला देना चाहता है 

स्त्री की सुगंध 

उसे घृणा हो जाती है 
उसे सब कुछ से घृणा हो जाती है 
उसे अपने आपसे घृणा हो जाती है 

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पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने जाता है 
तो हँसते हैं पुलिस वाले : 

"अजी अपना माल संभालकर रखना था भाईजी" 

किसी जानकार वक़ील को फोन करता है 
तो वक़ील कहता है 

"बालिग़ है / मैं क्या करूँ" 

किसी दबंग को फोन करता है 
तो दबंग कहता है : 

"मैं ऐसे मामले हाथ में नहीं लेता" 

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भागी हुई बेटी का पिता 
अगर बीड़ी पीता है तो बीड़ी डबल कर देता है 
अगर शराब पीता है तो शराब डबल कर देता है 
और कुछ नहीं पीता तो ख़ुद का ख़ून पीने लगता है 

कोई सांत्वना 
कोई उम्मीद 
कोई सहारा 

कुछ काम नहीं आता 

महीनों बाद बेटी फोन करती है घर पर 
तो माँ से बात करवाता है 
लेकिन ख़ुद बात नहीं करता 

दोहिते का जन्म होता है 
तो खिलौनों पर खर्च नहीं करता रुपया 

नहीं जाता 
बेटी के ससुराल 

बेटी को अपने घर में नहीं घुसाता 

उसके मुँह पर हमेशा गाली रहती है : 


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भागी हुई बेटी का पिता 
हमेशा भागी हुई बेटी का पिता रहता है 

मरने को भी होता है तो लोग कहते हैं : 

"अजी फलाने की हालत ख़राब है / दस बरस हुए बेटी को भागे / ऐसी रंगत उड़ी कि पागल ही हो गया" 

पत्नी समझाती है : गुस्सा छोड़ो! 
बेटे समझाते हैं : घर ले आओ बहन को! 
रिश्तेदार कहते हैं : अब क्या जान लोगे उसकी! 

लेकिन टस से मस नहीं होता 
भागी हुई बेटी का पिता 
उसकी नाक में चुभती है 
बीट में लिथड़े हुए नोचे हुए रंगीन पंखों की गंध! 

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आख़िरी वक़्त 
जब सब को पुकारता है पिता 
भागी हुई बेटी आती है मिलने 
मुँह फेर लेता है भागी हुई बेटी का पिता 
हालांकि दोहिते के सर पर हाथ फेरता है 
जंवाई खड़ा रहता है घर के बाहर 

दो टुकड़ों में बंटी हुई बेटी 
धड़ से ऊपर 
पिता की ओर भागती है 
धड़ से नीचे 
पति की ओर भागती है 

भागी हुई बेटी 
तराज़ू का काँटा है 
अपनी ही आत्मा में गड़ता हुआ 

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बेटी 
पिता से कहती है : सॉरी पापा! 

और 
इस नुक़ते पर 
प्राण पखेरू उड़ जाते हैं पिता के 

इस बार 
नहीं बोलता 
भागी हुई बेटी का पिता बेटी को 

कहता है : 

"ख़ुश रहो"! 

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भागी हुई बेटी 
अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण को कहती है :

"लड़की नहीं होना है तुझे"

"और होना भी है 
तो प्यार नहीं करने दूंगी तुझे 
कभी नहीं करने दूंगी प्यार"

@yashpalsinghtufani

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